मन रह रह के
उदास हो जाता है ।
आज क्यों?
क्या कमी है
मेरे जीवन में,
कुछ भी तो नहीं
फिर चिंता किस बात की।
दृष्टिपात करती हूं
पूरे दिनचर्या पर,
क्या घटित हुआ
आज सोचती हूं।
आज क्यों?......
याद आया
मां का फोन आया था,
लड़ाई हुई थी भाई भाभी में
रात को सभी सो गए
भूखे पेट,
बेचारी को पागल बोला
भाई ने उसे जो
दो छोटे-छोटे बच्चों की मां
पूरे दिन उन में लगी रहती है,
ना कुछ बोलती है
ना मांगती है
गूंगी सी बनी रहती है ।
फिर भी पसंद नहीं इन मर्दों को
न बोलने वाली न
सुनने वाली,
औरत आखिर
बने तो बने कैसे
सत्ता पर बैठे सत्ताधीशो का
रोजगार चल रहा है ।
बेरोकटोक
और युवाओं को कुरौना के नाम
पर बेरोजगारी के गर्त में
धकेल कर,
कैसे सो पाते हैं
सबका घर उजाड़ कर।
सबका जड़ है बेरोजगारी
निठल्ला पन,
अपने ही घर में
एक औरत पर
अत्याचार होता है।
और मैं कुछ नहीं कर पाती
यही सोचकर
मन उदास हो जाता है
आज क्यों ?
नहीं बार-बार......